आत्महत्या से कैसे बचे ?
आत्महत्या यह उन लोगो के लिए अंतिम सहारा होता है जो मानसिक रूप से हार चुके होते है ! ऐसे लोग विचारो के मकड़ जाल में ऐसे उलझ जाते है की उनको उस समस्या को खत्म करने के लिए इतना टाइम नहीं मिल पाता है की वो उसके समाधान के वारे में विचार ही नहीं कर पाता है ! उसके मन में एक ऐसी मायूसी छा जाती है की उसको हर जगह से न उम्मीदी नजर आने लगती है! उसके मन में डर बैठ जाता है , वह अपनी बात लोगो तो शेयर भी नहीं कर पाता है! उसको लगता है पता नहीं ये लोग क्या सोचेंगे या मेरा मजाक बनेंगे या मेरे कारन ये सब और परेशान हो जायेंगे ! इस लिए वह यह नकारत्मक विचार अपने अंदर जमा करता रहता है ! और ये नकारत्मक विचार उस व्यक्ति के मन पर हावी हो जाते है फिर उसको क्या सही है क्या गलत है कुछ भी नहीं अंतर मालूम पड़ता है
लक्छड़--------अब प्रश्न यह है की इसके मानसिक लक्छड़ क्या है? जब ऐसा व्यक्ति मानसिक विकारो में उलझ जाता है तो उसकी एक्टिविटी क्या होती है ? आइये कुछ पॉइंट्स है जिन पर बात करते है--
ऐसा व्यक्ति मन ही मन खामोश रहने लगता है वह किसी से बात नहीं करता है, चेहरा बुझा बुझा से लगने लगता है , भूख ख़त्म हो जाती है, नींद नहीं अति है, धड़कने बढ़ जाती है, सर दर्द , बैचेनी, घबराहट, शोर या भीड़ भाड़ वाले इलाकों से डरना, दिमाग में चीजों को देख कर डर लगना, मरने मारने के विचार आना इत्यादि ! क्या आपको भी ये सारी परेशानिया है? क्या आपको भी कंही सुकून नहीं मिल रहा है ? सब कुछ होते हुए भी आपका मन अशांत है ? वह दिन हो या रात विचारो में खोया रहता है ? तो इसके समाधान की तैयारी अभी से करना शुरू कर दो!
समाधान - अब प्रश्न यह है क्या इसका समाधान भी है ? क्या इसकी मेडिसिन इतनी कारगर है जिससे इसको रोका जा सके ? जबाबा हाँ भी है और न भी ! मेडिसिन है लेकिन उनके अनेको साइड इफ़ेक्ट होते है और जब तक आप उनका सेवन करते हो तभी तक वह कारगर होत्ती है इसके बाद असर खत्म या कम हो जाता है! क्योकि यह एक वैचारिक प्रक्रिया है तो इसका समाधान दवा और दुआ दोनों से करते है!
सबसे पहले ऐसे व्यक्ति को कुछ चीजों को अपनी दिन चर्या में शामिल करना होगा ! जिसमे उसको जल्दी सुबह उठकर योग , प्रायाणाम करना होगा काम से काम आधा घंटे! इसमें भ्रामरी, कपालभांति, स्वास प्रस्वास और कुछ एक्सेसिज़ शामिल करना होगा ताकि आप उस समस्या से लड़ने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार हो सके! प्राणायाम करने से आपके ब्लड और मस्तिष्क को ऑक्सीजन अधिक मात्रा में मिलेगा और मेन्टल और शारीरिक हेल्थ में हेल्प मिलेगी! अब नेक्स्ट आपको करना होता है ध्यान ! जिसके लिए आपको स्न्नान करके ईश्वर की पूजा पाठ
करके स्टार्टिग में आधा घंटे करना है! अब आपको यह समझना है आपको मानसिक रूप से ठीक करने के लिए ईश्वर में आस्था और ध्यान ये बहुत जरूर चीजे है और आपको यह भी स्वीकार करना होगा मेडिसिन आपको रहता दे सकती है लेकिन इलाज पूर्ण रूप से नहीं दे सकती!
रोज आपको सुबह और शामको आधा घंटा टाइम निकल कर ध्यान करना है! अब ध्यान कैसे लगाना है ये जाने ! आपको भगवान के सामने या अन्य एकांत स्थान पर बैठ जाना है जैसे आपको सरल लगे! अगर किसी को कमर में दर्द है या पैर में दिक्क्त होती है तो वह कुर्सी का सहारा ले सकता है ध्यान रहे कमर सीधी रहे! अब पहले स्वास प्रश्वास की प्रिक्रिया ५-१० मिनट करे अब अपने शरीर को ठीला छोड़ अपने मन को एक दम शांत करले! अब अपनी स्वांस पर आपको ध्यान देना की वह कोण से नक् छिद्र से आ रही है और जा रही है, स्वास की प्रिक्रिया स्वता होनी चाहिए आपको खुद से स्वांस नहीं लेना है वह प्रकृतिक प्रकिरिया है और उसी पर ध्यान दे, जब आप सोने जाते हो विस्तर पर तो यह लेटकर भी कर सकते हो लेते अपने शरीर को ठीला छोड़ दे और अपने स्वांस पर ध्यान लगाए ये उन लोगो के लिए बहुत बढ़िया है जिनको रत में नींद नहीं आती या घबराहट होती है!
जब आप इस प्रिक्रया में निपुड़ हो जायँगे तो आप देखेंगे की आपके अंदर जो बेचैनी थी, घबराहट होती थी , धड़कने बढ़ जाती थी वो सब धीरे धीरे बंद होने लगी है और हाँ प्रभु का स्मरण जरूर करे ! ये आपको मानसिक बल देगा ! इसके लिए आप रामायण, गीता , वेदो को पढ़ सकते है मोबाइल में ऍप्स डाउनलोड कर सकते है अनेक तरीके है !और एक बात आपको अपने मन में वैठानि की एक ऐसा व्यक्ति या दोस्त तलाश ले जिसको हर शाम को अपनी सारी नकारत्म या पोसिटिव बाते उसको बतानी है लेकिन मन में नहीं रखनी। । इससे आपके मन को हल्कापन लगेगा !

Nice kohli ji
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